
निजता हनन के आरोप, जांच समिति गठित
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में एक डॉक्टर के कमरे में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विभागाध्यक्ष की शिकायत के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी है।
निजी खर्च से लगाया गया कैमरा बना विवाद की वजह
जानकारी के अनुसार विभाग के एक डॉक्टर ने अपने कक्ष में निजी खर्च से सीसीटीवी कैमरा लगवाया था। इस पर विभागाध्यक्ष ने आपत्ति जताते हुए कुलसचिव और चीफ प्रॉक्टर को लिखित शिकायत सौंपी।
गैलरी और दूसरे कमरे तक फोकस होने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि कैमरे का दायरा केवल संबंधित डॉक्टर के कमरे तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका कुछ हिस्सा बाहर की गैलरी और पास के एक अन्य कमरे की ओर भी जाता है। आरोप है कि जिस कमरे की ओर कैमरे का फोकस होने की आशंका है, वहां पुरुष और महिला कर्मचारी बैठकर कार्य करते हैं, जिससे उनकी निजता प्रभावित हो सकती है।
मौके पर पहुंची टीम, कैमरा हटाने की सिफारिश
मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ प्रॉक्टर डॉ. आरएएस कुशवाहा सहित अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में कैमरा हटाने की सिफारिश की गई।
आईटी सेल से तकनीकी जांच की मांग
इसी बीच विभागाध्यक्ष ने कैमरे को KGMU के आईटी सेल को सौंपकर तकनीकी जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कैमरे का वास्तविक फोकस किस दिशा में था। फिलहाल संबंधित डॉक्टर के कमरे में ताला लगा दिया गया है। आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी।
डॉक्टर ने आरोपों को बताया निराधार
विवाद में घिरे डॉक्टर ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने विभाग में हो रही कुछ अनियमितताओं को उजागर किया था, जिसके बाद उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस हुआ। इसी कारण उन्होंने सीसीटीवी कैमरा लगवाया।
डॉक्टर का दावा है कि कैमरे का फोकस किसी अन्य कर्मचारी या कमरे की ओर नहीं था और उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से पूरा मामला खड़ा किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कैमरा लगाने से पहले उन्होंने अधिकारियों को पत्र लिखकर सूचना दी थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
प्रवक्ता का बयान
KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।