
लखनऊ। सामाजिक समरसता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवीय रिश्तों को सुदृढ़ करने के संदेश के साथ वरिष्ठ पत्रकार एवं हिन्दी दैनिक ‘इन्किलाबी नजर’ के सम्पादक एसडी. बडोला की पुस्तक “तुम्हरे हमरे राम बराबर” का विमोचन सोमवार को यूपी प्रेस क्लब में आयोजित एक गरिमामय समारोह में किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, ‘स्माइलमैन’ के नाम से प्रसिद्ध हास्य कवि सर्वेश अस्थाना ने अपने संबोधन में कहा कि यह पुस्तक इस बात का प्रमाण है कि आज भी देश में अभिव्यक्ति की पूरी आजादी मौजूद है। उन्होंने पुस्तक के शीर्षक की सराहना करते हुए कहा कि “तुम्हरे हमरे राम बराबर” जैसा शीर्षक इतना प्रभावशाली है कि इस पर गीत और ग़ज़लें भी रची जा सकती हैं।
उन्होंने आगे कहा कि सामान्यतः लेखक पुस्तक लिखते समय बिक्री और पहचान को ध्यान में रखते हैं, लेकिन एसडी. बडोला ने अपने मन में उठने वाले विचारों, संवेदनाओं और सामाजिक उथल-पुथल को ईमानदारी से प्रस्तुत किया है। उनकी लेखनी में निर्भीकता साफ दिखाई देती है, क्योंकि उन्होंने अपनी पुस्तक में अखिलेश यादव से लेकर सोनिया गांधी तक की राजनीति का उल्लेख किया है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं उर्दू साहित्यकार अहमद इब्राहिम अल्वी ने कहा कि अक्सर अखबारों में लेखक के संघर्षों का जिक्र नहीं होता, जबकि वह अनेक कठिनाइयों के बीच समाज का आईना दिखाने का काम करता है। उन्होंने एसडी. बडोला को एक गंभीर और संवेदनशील व्यक्तित्व बताते हुए आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक समाज की दिशा बदलने में सहायक सिद्ध होगी।
वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र भदौरिया ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कभी हमें अपनी सभ्यता पर गर्व होता था, लेकिन आज यह हमारी गलतफहमी साबित हो रही है, क्योंकि सामाजिक मूल्य लगातार कमजोर हो रहे हैं। उन्होंने बडोला को ‘शब्द साधक’ की संज्ञा देते हुए कहा कि यह पुस्तक सामाजिक रिश्तों को बचाने और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में समाज को अपने रिश्तों को सहेजने की सख्त आवश्यकता है।
वहीं, सुधीर मिश्रा (सम्पादक, नवभारत टाइम्स) ने पुस्तक के शीर्षक की प्रशंसा करते हुए कहा कि भगवान राम को किसी भी प्रकार से विभाजित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पुस्तक की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार जेपी शुक्ला ने कहा कि इस पुस्तक की पारंपरिक अर्थों में समीक्षा संभव नहीं है, क्योंकि इसमें विविध विषयों पर ऐसी रचनाएं हैं, जिनमें हर पाठक को अपनी रुचि के अनुसार कुछ न कुछ अवश्य मिलेगा।
समारोह का संचालन प्रेमकांत तिवारी ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार, साहित्यकार और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। कुल मिलाकर यह आयोजन न केवल एक पुस्तक विमोचन था, बल्कि सामाजिक एकता, विचारों की स्वतंत्रता और मानवीय मूल्यों को पुनः स्थापित करने का एक सशक्त संदेश भी दे गया।