लोकसभा अध्यक्ष ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर दिया जोर
लखनऊ। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को कहा कि नागरिक चुनाव में मतदान इस विश्वास के साथ करते हैं कि उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि उनकी समस्याओं, चुनौतियों और अपेक्षाओं को विधायिका के मंच पर उठाएंगे और उनके समाधान की दिशा में प्रभावी प्रयास करेंगे।
विधायिका आखिरी व्यक्ति की आवाज सरकार तक पहुंचाती है
यह बातें उन्होंने यहां आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन और विधायी निकायों के सचिवों के 62वें सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहीं। बिरला ने कहा कि विधायिका वह सशक्त मंच है, जिसके माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज सरकार तक पहुंचती है।
न्यायपालिका की तरह विधायिका से भी लोगों को अपेक्षाएं
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जैसे नागरिक न्यायपालिका से निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद करते हैं, वैसे ही वे विधायिका से भी सकारात्मक सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण की अपेक्षा रखते हैं। उन्होंने कहा, जब प्रतिनिधि सकारात्मक इरादों से मुद्दे उठाते हैं और सार्थक बहस होती है, तो निश्चित रूप से ठोस परिणाम सामने आते हैं।
पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन लोकतंत्र को करते हैं मजबूत
बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों और विधायी सचिवों के सम्मेलन
-
लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाते हैं
-
उन्हें जनता के प्रति अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जिम्मेदार बनाते हैं
विधानसभाओं की बैठकें बढ़ाने पर दिया जोर
लोकसभा अध्यक्ष ने विधायी कार्यवाही की घटती अवधि पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य विधायिकाओं को वर्ष में कम से कम 30 दिन अवश्य बैठना चाहिए, ताकि
-
सकारात्मक
-
मुद्दा आधारित
-
विकासोन्मुख चर्चाएं
सुनिश्चित की जा सकें।
संवाद और नवाचार से ही विकसित भारत का लक्ष्य संभव
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता के और करीब लाने के लिए निरंतर संवाद, नवाचार और सुधार आवश्यक हैं, ताकि उनका कार्य विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य से जुड़ सके।
उत्तर प्रदेश की पहलों की सराहना
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना भी मौजूद रहे। बिरला ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की पहलों की सराहना करते हुए कहा कि विधायिकाओं में निरंतर संवाद से विकास और सुशासन को गति मिलती है।
