बरनाला रैली में राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला

बरनाला रैली में राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला

बरनाला (पंजाब)। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते के जरिए कृषि उत्पादों सहित अमेरिकी सामानों के लिए भारतीय बाजार खोलकर किसानों और लघु एवं मध्यम उद्योगों के “डेथ वारंट” पर हस्ताक्षर कर दिए गए हैं।

किसानों के लिए ‘तूफान’ की चेतावनी

पंजाब के बरनाला में आयोजित किसान महाचौपाल रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका के बादाम, सेब, दालें, कपास और सोयाबीन भारत आने से देश में बड़ा आर्थिक तूफान आएगा। उन्होंने दावा किया कि इससे भारतीय किसान गंभीर संकट में पड़ जाएंगे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री यह कदम उठाना नहीं चाहते थे, लेकिन दबाव में आकर उन्होंने समझौता किया।

दबाव में लिया गया फैसला: राहुल

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कथित “एप्स्टीन फाइल” जारी करने की धमकी और उद्योगपति गौतम अदाणी की कंपनी से जुड़े अमेरिका में चल रहे मामले के कारण प्रधानमंत्री ने यह निर्णय लिया। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर मंत्रिमंडल, कृषि मंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री से भी परामर्श नहीं किया गया।

पंजाब कांग्रेस को भी सख्त संदेश

रैली के दौरान राहुल गांधी ने पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का नाम लेते हुए कहा कि पार्टी में टीम भावना जरूरी है। जो नेता टीम के खिलाड़ी नहीं बनेंगे, उन्हें “रिजर्व” में बैठा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी किसी एक व्यक्ति से बड़ी है।

समझौते पर सवाल

राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब भारत हर साल नौ लाख करोड़ रुपये के अमेरिकी उत्पाद खरीदने पर सहमत हुआ, तो बदले में देश को क्या मिला। उन्होंने कहा कि इससे देश के लघु एवं मध्यम उद्योग खत्म हो सकते हैं। उनके अनुसार, कृषि क्षेत्र को खोलने को लेकर चार महीने तक असहमति रही, लेकिन अंततः सरकार ने अमेरिकी दबाव में आकर फैसला लिया।

किसानों के भविष्य पर चिंता

राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका में बड़े पैमाने पर मशीनीकृत खेती होती है, जबकि भारत में छोटे किसानों के पास सीमित संसाधन हैं। ऐसे में यह समझौता हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्यों के किसानों को प्रभावित कर सकता है।

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