रसोई गैस 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 114.5 रुपये महंगा

Gas पश्चिम एशिया संकट का असर रसोई गैस 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 114 रुपये महंगा

पश्चिम एशिया संकट का असर : पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर


नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। शनिवार को घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) के दाम में 60 रुपये और वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमत में 114.5 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है।


दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर 913 रुपये

सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का गैर-सब्सिडी वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर अब 913 रुपये में मिलेगा, जो पहले 853 रुपये था।
पिछले एक साल से कम समय में यह एलपीजी कीमतों में दूसरी बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है।


उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर भी असर

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर पर भी कीमत बढ़ोतरी का असर पड़ेगा।
करीब 10 करोड़ लाभार्थियों को अब 300 रुपये की सब्सिडी के बाद प्रति सिलेंडर 613 रुपये चुकाने होंगे।


सरकार का तर्क: वैश्विक कीमतों में उछाल

सरकारी सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लेना पड़ा।
सूत्रों के अनुसार, बढ़ोतरी के बाद भी एलपीजी की कीमत लागत के बराबर होने के लिए आवश्यक लगभग 1050 रुपये प्रति सिलेंडर से कम बनी हुई है।


परिवार पर कितना पड़ेगा असर

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एक परिवार साल में औसतन 4–5 सिलेंडर इस्तेमाल करता है।
इस हिसाब से यह बढ़ोतरी एक परिवार के लिए लगभग 80 पैसे प्रतिदिन और प्रति व्यक्ति करीब 20 पैसे प्रतिदिन के बराबर पड़ती है।


पड़ोसी देशों से अभी भी सस्ती गैस

अधिकारियों के मुताबिक, कीमत बढ़ने के बावजूद भारत में एलपीजी अभी भी कई पड़ोसी देशों से सस्ती है।

  • काठमांडू – 1,207 रुपये

  • श्रीलंका – 1,241 रुपये

  • पाकिस्तान – 1,046 रुपये


पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर

सरकारी सूत्रों ने बताया कि अप्रैल 2022 से पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
सरकारी तेल कंपनियां IOC, BPCL और HPCL फिलहाल अंतरराष्ट्रीय दबाव को संभालने की स्थिति में हैं।


पश्चिम एशिया संघर्ष से बढ़ा संकट

पिछले सप्ताह ईरान पर हुए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है।
इसका असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है, जो तेल और गैस के वैश्विक निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। यहां से गुजरने वाले टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।


कच्चे तेल और एलएनजी की कीमतों में उछाल

28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से:

  • अमेरिकी कच्चा तेल 35.63% बढ़कर 90.90 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।

  • एशियाई एलएनजी की कीमत 25.40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच गई, जो तीन साल का उच्चतम स्तर है।


भारत की आयात निर्भरता

भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 85–90 प्रतिशत आयात करता है।
इसका बड़ा हिस्सा सऊदी अरब जैसे देशों से आता है, जो परिवहन के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं।


सरकार ने बढ़ाया उत्पादन

घरेलू आपूर्ति मजबूत रखने के लिए सरकार ने शुक्रवार को आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है।

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