लखनऊ में समता अधिकार सम्मेलन: बहुजन एकजुटता और सामाजिक न्याय की लड़ाई तेज करने का संकल्प

Share Now

लखनऊ में समता अधिकार सम्मेलन में जुटे बहुजन आंदोलन के प्रतिनिधि

👉 शोषित जातियों को वर्ग के रूप में संगठित करने से ही सामाजिक न्याय संभव : रिंकू यादव
👉 साम्प्रदायिक और जातीय भेदभाव के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान : मुहम्मद शोएब

लखनऊ। डॉ. भीमराव अंबेडकर, बी. पी. मंडल और ज्योतिबा फुले को याद करते हुए यूपी प्रेस क्लब में समता अधिकार सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में बहुजन समाज के बुद्धिजीवी, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता, छात्र और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम में जातीय जनगणना, यूजीसी रेगुलेशन के समर्थन और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर संघर्ष तेज करने की रणनीति तय की गई। साथ ही ‘करेंट एजेंडा’ पत्रिका और ‘बसावन इंडिया’ का विमोचन भी हुआ।

वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया ने कहा कि मौजूदा दौर में बहुजन समाज की नई पीढ़ी सबसे ज्यादा निशाने पर है। उन्होंने यूजीसी गाइडलाइंस का जिक्र करते हुए कहा कि कैंपसों में भेदभाव के खिलाफ बने कानूनों का विरोध, संविधान की भावना के खिलाफ है। उनके अनुसार, जैसे-जैसे सामाजिक न्याय की चेतना बढ़ती है, वैसे-वैसे सांप्रदायिक ताकतें उसे कमजोर करने की कोशिश करती हैं और निजीकरण को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

बिहार से आए सामाजिक न्याय आंदोलन के संयोजक रिंकू यादव ने कहा कि हिंदी पट्टी में सामाजिक न्याय का आंदोलन अब युवाओं के नेतृत्व में सड़कों पर मजबूत हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शोषित जातियों को वर्ग के रूप में संगठित करना और जाति जनगणना के आधार पर भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है।

जेएनयू छात्रसंघ के सहसचिव दानिश ने कहा कि जातिगत भेदभाव आज भी संस्थानों में चरम पर है। उन्होंने रोहित वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी जैसे मामलों का जिक्र करते हुए संस्थागत भेदभाव पर चिंता जताई।

प्रो. राजेंद्र वर्मा ने कहा कि श्रमण परंपरा और मनुवादी विचारधारा के बीच संघर्ष बहुत पुराना है। उन्होंने बताया कि एक ओर समता और समानता की सोच है, तो दूसरी ओर भेदभाव पर आधारित व्यवस्था।

मुहम्मद शोएब ने कहा कि सांप्रदायिकता और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष को और तेज करना होगा। उन्होंने युवाओं से विचारधारा के साथ मैदान में उतरने की अपील की।

‘करेंट एजेंडा’ के संपादक अनूप पटेल ने जाति जनगणना के लिए एकजुट संघर्ष की जरूरत बताई। वहीं शिवकुमार यादव ने कहा कि सामाजिक न्याय के विचारों को गांव-गांव तक पहुंचाना जरूरी है।

सम्मेलन के अंत में इंकलाबी नौजवान सभा के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य ने 11 सूत्रीय प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें यूजीसी बिल लागू करने, जातीय जनगणना, महिला आरक्षण में ओबीसी आरक्षण, निजी क्षेत्र में आरक्षण और मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग शामिल रही। सभी प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित किए गए।

कार्यक्रम का संचालन राजीव यादव ने किया। सम्मेलन में मनीष कुमार, मुकेश विश्वकर्मा, हरीश चंद्र, मोहम्मद उमर, ऊषा विश्वकर्मा, देवेंदु निषाद, मानविका, सुकृति और राम कुमार समेत कई लोग मौजूद रहे।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *