दिग्गज विशेषज्ञों से जुड़ेंगे छात्र

लखनऊ। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय ने छात्रों को व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पहली बार छह ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की नियुक्ति को मंजूरी दी है। कुलपति प्रो. अजय तनेजा की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कार्य परिषद की बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया।
विश्वविद्यालय से जुड़े विशेषज्ञों में वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र कुमार राय, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनोज कुमार सिंह, पूर्व आईपीएस अधिकारी जी.के. गोस्वामी, इरशाद अहमद, अखिलेश शुक्ला और मुकेश बहादुर सिंह शामिल हैं। इन विशेषज्ञों के अनुभव से छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ वास्तविक कार्यक्षेत्र की चुनौतियों और व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र कुमार राय का चयन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश और देश के विभिन्न शहरों में आपराधिक मामलों के प्रख्यात अधिवक्ता हैं तथा प्रतिष्ठित लॉ फर्म कोलंबस लीगल के संस्थापक हैं। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को न्यायिक प्रक्रिया, मुकदमों की तैयारी, साक्ष्यों के महत्व, कानूनी रणनीति और अदालत की वास्तविक कार्यवाही को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ पहल का उद्देश्य सैद्धांतिक शिक्षा को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ना और छात्रों को भविष्य के करियर के लिए अधिक सक्षम बनाना है।