शिक्षक दिवस पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला

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शिक्षक दिवस पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला

शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा समय में शिक्षा प्रणाली कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जहां हर छात्र को समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य मिल सके।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने ज्ञान, सेवा और समर्पण से छात्रों का भविष्य संवारते हैं और देश की आने वाली पीढ़ियों को दिशा देते हैं, इसलिए उनका योगदान अमूल्य है।

समान अवसर वाली शिक्षा व्यवस्था की जरूरत

राहुल गांधी ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था आज कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। उनका कहना था कि सभी को मिलकर ऐसी शिक्षा प्रणाली तैयार करनी होगी, जिसमें हर विद्यार्थी को बराबर अवसर और बेहतर शिक्षा उपलब्ध हो।

खड़गे ने लगाए कई आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी शिक्षक दिवस के मौके पर केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया गया है और इससे युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

वीडियो में किए गए ये दावे

कांग्रेस द्वारा साझा किए गए वीडियो में भाजपा सरकार पर कई आरोप लगाए गए। वीडियो में दावा किया गया कि देश में प्रतिदिन 25 सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं, कुल स्कूलों में सरकारी स्कूलों की हिस्सेदारी 71 प्रतिशत से घटकर 49 प्रतिशत रह गई है और हजारों सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

इसके अलावा वीडियो में यह भी दावा किया गया कि भाजपा ने शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का छह प्रतिशत खर्च करने का वादा किया था, लेकिन वर्तमान में केवल 4.1 प्रतिशत खर्च किया जा रहा है। साथ ही वर्ष 2014 के बाद से 152 परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने का दावा भी किया गया है।

कांग्रेस नेताओं के इन बयानों के माध्यम से शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

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