
इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी रविवार को ईरान के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वह तेहरान में ईरानी नेताओं और अधिकारियों के साथ मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों तथा दोनों देशों के बीच पहले बनी सहमतियों को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि नकवी की यात्रा मुख्य रूप से द्विपक्षीय बातचीत पर केंद्रित रहेगी। ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के अनुसार, इस दौरे में किसी विशेष मध्यस्थता संदेश पर चर्चा की योजना नहीं है। हालांकि, पाकिस्तान के एक आर्थिक मंत्री के भी नकवी के साथ ईरान पहुंचने की संभावना है।
पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव
नकवी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय तनाव लगातार बना हुआ है। सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष तेज होने से क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। सऊदी अरब की ओर से हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए गए हैं, जबकि हूती विद्रोहियों ने ड्रोन और मिसाइलों के जरिए सऊदी ठिकानों को निशाना बनाया है।
इस तनाव का असर सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों के साथ-साथ लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक समुद्री व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इस मार्ग से होकर गुजरता है।
बातचीत बहाल कराने में पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच रुकी हुई बातचीत को दोबारा शुरू कराने के प्रयासों में भी भूमिका निभा रहा है। दोनों पक्षों के बीच जून में एक अंतरिम शांति समझौता हुआ था, जिसमें पाकिस्तान गारंटर के रूप में शामिल था। हालांकि, जुलाई में सैन्य तनाव बढ़ने के बाद बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा मुद्दा भी क्षेत्रीय तनाव में महत्वपूर्ण बना हुआ है। बघाई के अनुसार, नकवी की यात्रा के दौरान क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हो सकती है, लेकिन किसी विशेष अमेरिकी संदेश या प्रस्ताव को लेकर उनके ईरान आने की जानकारी नहीं है।
पहले हुए समझौतों को आगे बढ़ाने पर जोर
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि नकवी की यात्रा का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान और ईरान के बीच पहले से बनी सहमतियों को आगे बढ़ाना है। खास तौर पर दोनों देशों के नेतृत्व स्तर पर लिए गए फैसलों को लागू करने और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर बातचीत होने की संभावना है।