दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान करीब 200 लोग हिरासत में लिए गए, सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक अपना आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। रविवार को राजधानी दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए। इस दौरान करीब 200 छात्रों और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और इंटरनेट सेवाओं पर दिया निर्देश
उच्चतम न्यायालय ने रविवार को कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने वाले लोगों को गैरकानूनी रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए अधिकारियों को दिल्ली मेट्रो का सामान्य संचालन सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवाएं निर्बाध बनाए रखने का निर्देश दिया।
पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन करने से न रोका जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अलावा अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए।
यह सुनवाई उस याचिका पर हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कॉजपा के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाओं के संचालन को लेकर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन हुआ। याचिका में इस मामले में अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई थी।
तीन कॉजपा नेताओं को रिहा किया गया
कॉजपा के नेता अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रविवार सुबह रिहा कर दिया गया। इन तीनों को शनिवार को दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत में लेने के बाद एहतियातन गिरफ्तार किया गया था। कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद उन्हें एक वर्ष तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर रिहा किया गया।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, तीनों की ओर से 50,000 रुपये का जमानती बॉण्ड दाखिल किया गया। इसके बाद अदालत ने उनकी रिहाई का आदेश दिया।
कॉजपा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर नेताओं की रिहाई को बड़ी कानूनी जीत बताते हुए लिखा कि दिल्ली पुलिस को अंततः उन्हें रिहा करना पड़ा।
इस्तीफे तक नहीं रुकेगा विरोध प्रदर्शन : आशुतोष रांका
रिहाई के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कॉजपा के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि तय स्थान पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से कानून-व्यवस्था भंग नहीं होती।
कॉजपा नेता सौरव दास ने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने ही नागरिकों के खिलाफ पूरे तंत्र को खड़ा कर दिया है। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारियों पर प्रतिबंध लगाने के बजाय अधिकारियों को उनके प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करनी चाहिए थी।
दास ने यह आरोप भी लगाया कि हिरासत के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बिना जब्ती नोटिस जारी किए उनके फोन ले लिए। उन्होंने आशंका जताई कि फोन के साथ छेड़छाड़ कर उनमें दस्तावेज या अन्य सामग्री डाली जा सकती है, जिसका बाद में उनके खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
छात्र संगठनों और विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया
रविवार को प्रदर्शन के दौरान स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) समेत कई छात्र संगठनों के सदस्यों को हिरासत में लिया गया। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास और आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।
प्रदर्शनकारी नारे लगाते हुए जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे थे। इस दौरान पुलिसकर्मियों को कई प्रदर्शनकारियों को बसों में ले जाते हुए देखा गया।
राजधानी में सुरक्षा के मद्देनजर प्रमुख सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई थी। हालांकि, रविवार को सभी मेट्रो स्टेशन खुले रहे और लुटियंस दिल्ली में यातायात पर कोई बड़ा प्रतिबंध नहीं लगाया गया।
ध्रुव राठी ने अपहरण का आरोप लगाया
यूट्यूबर ध्रुव राठी ने रविवार को दावा किया कि 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सादे कपड़ों में आए करीब 20 लोग उनके घर में घुस आए और उन्हें अलग-अलग पुलिस थानों में ले गए।
एक्स पर पोस्ट किए गए वीडियो में राठी ने कहा कि शनिवार सुबह करीब सात बजे जब वह सो रहे थे, तब ये लोग उनके घर पहुंचे। उनके अनुसार, उन्हें लगभग 22 से 23 घंटे तक अपने वकील से संपर्क करने और फोन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि घर से बाहर ले जाते समय उन्हें चोटें आईं।
राठी ने अपने अनुभव को हिरासत के बजाय अपहरण करार दिया और उन्हें घर से ले जाने के तरीके पर सवाल उठाए। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
महिला से जुड़े पुराने मामले में नए नोटिस
दिल्ली पुलिस ने कॉजपा के नेताओं को एक महिला से जुड़े पुराने मामले में नए नोटिस भी जारी किए। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद ये नोटिस जारी किए गए।
मामला कथित तौर पर महिला की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर आपत्तिजनक तस्वीरें बनाने और उन्हें इंटरनेट पर प्रसारित करने के आरोपों से संबंधित है। उच्च न्यायालय ने पहले महिला की याचिका पर कॉजपा के नेताओं को नोटिस जारी किए थे और पुलिस को भी आवश्यक नोटिस देने का निर्देश दिया था।
बंगला साहिब गुरुद्वारे में व्यवधान का आरोप
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई नेताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में बंगला साहिब गुरुद्वारे के परिसर में कथित व्यवधान पैदा करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान भ्रामक वीडियो प्रसारित करने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत के मुताबिक, शनिवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए गुरुद्वारे के परिसर में एकत्र हुए थे। आरोप है कि आम आदमी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता और समर्थक परिसर में घुसकर प्रदर्शन करने लगे, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हुई। शिकायत में धार्मिक स्थल की पवित्रता का राजनीतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया गया है। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा।
दादी के निधन की सूचना देने पर दिल्ली पुलिस ने जारी किया वीडियो
दिल्ली पुलिस ने रविवार को एक वीडियो जारी कर कॉजपा नेता अभिजीत दीपके के उस दावे का खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि हिरासत के दौरान उन्हें अपनी दादी के निधन की जानकारी नहीं दी गई।
पुलिस उपायुक्त नेहा यादव ने संवाददाता सम्मेलन में वीडियो दिखाते हुए कहा कि दीपके को उनकी दादी के निधन की सूचना संवेदनशील तरीके से दी गई थी। पुलिस के अनुसार, उन्हें अंतिम संस्कार का समय भी बताया गया और अपने गृह नगर जाने के लिए सहायता की पेशकश की गई, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।
यह वीडियो दीपके की मां के उस आरोप के बाद जारी किया गया, जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस पर अपने बेटे को दादी के निधन की जानकारी न देने और झूठ बोलने का आरोप लगाया था। कॉजपा ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे।
एसआईआर और वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्ष का अभियान
राष्ट्रीय राजधानी में इस महीने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इस बीच, विपक्षी गठबंधन इंडिया की ओर से सोमवार को एक और मार्च निकालने की तैयारी की जा रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि उन्होंने और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार शाम चार से पांच बजे के बीच भारत के प्रधान न्यायाधीश से मुलाकात का समय मांगा है। खरगे के अनुसार, विपक्षी नेता कथित वोट चोरी के मुद्दे पर प्रधान न्यायाधीश से हस्तक्षेप की मांग करेंगे।
कॉजपा ने जहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है, वहीं राजधानी में विरोध प्रदर्शन, हिरासत और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद तेज होता दिखाई दे रहा है।
