वाराणसी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ, पीएम मोदी के गुजरात मॉडल का किया उल्लेख
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में बच्चों के पोषाहार की आपूर्ति तक में शराब माफियाओं का दखल था। उन्होंने कहा कि उस समय आंगनवाड़ी केंद्रों पर महीनों तक राशन नहीं पहुंचता था, जबकि अब पोषाहार वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया गया है।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को वाराणसी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों, किशोरियों और उनके परिवारों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया।
आंगनवाड़ी केंद्रों को बनाया जा रहा आधुनिक
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर उन्हें पोषण और प्रारंभिक शिक्षा का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई “नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना, नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना” का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रही है, जहां कोई गरीब, दुखी या वंचित न रहे।
उन्होंने कहा कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर किया गया निवेश ही विकसित भारत की नींव मजबूत करेगा। सक्षम बच्चे आगे चलकर कुशल युवा बनेंगे और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देंगे।
पीएम मोदी के गुजरात मॉडल का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए जिन योजनाओं और विजन को लागू किया था, वही मॉडल आज पूरे देश में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भी उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
‘मेरी आंगनवाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ है इस बार की थीम
इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह की थीम “मेरी आंगनवाड़ी, मेरी जिम्मेदारी” रखी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के दौरान पांच प्रमुख विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा—
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आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन,
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आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताजा एवं हॉट-कुक्ड मील,
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सामुदायिक भागीदारी और जवाबदेही,
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प्रारंभिक बाल शिक्षा,
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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना।
उन्होंने कहा कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार बेहद जरूरी है।
1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच रही पोषण सेवाएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगभग 1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं और 897 बाल विकास परियोजनाओं के माध्यम से सेवाएं संचालित की जा रही हैं। हर महीने करीब 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पोषण सेवाएं पहुंच रही हैं। इसके अलावा लगभग 35.46 लाख बच्चों को हॉट-कुक्ड मील दिया जा रहा है और करीब 46 लाख बच्चों के वजन, स्टंटिंग और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत देशभर में अब तक लगभग पांच करोड़ माताओं को 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है।
केंद्रीय मंत्रियों ने भी की सराहना
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि जनहित की योजनाओं को प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू करने का उदाहरण उत्तर प्रदेश ने प्रस्तुत किया है।
केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि पोषण और महिला सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं सुरक्षित होंगी, तभी वे शिक्षा, स्वास्थ्य और अपने बच्चों के भविष्य से जुड़े फैसले बेहतर ढंग से ले सकेंगी।
प्रदेश सरकार में मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण के साथ-साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा के प्रभावी केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
