बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने जारी किया कारण बताओ नोटिस, व्यावसायिक कदाचार का आरोप
लखनऊ। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल और महामंत्री अवनीश दीक्षित का अधिवक्ता पंजीकरण निलंबित करते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। काउंसिल के सचिव आर.के. शुक्ल की ओर से मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में इसकी जानकारी दी गई।
आपात बैठक में लिया गया फैसला
बार काउंसिल की आपात वर्चुअल बैठक में पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र मिश्र नगरहा के प्रस्ताव पर विचार किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि 23 अगस्त 2026 को हुई सामान्य बैठक में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश के अनुरूप सेंट्रल बार एसोसिएशन का चुनाव कराने के लिए गठित एल्डर्स कमेटी को अधिकृत किया गया था।
निर्णय के अनुसार चुनाव बार काउंसिल के पांच सदस्यों— श्रीनाथ त्रिपाठी, इमरान माबूद खान, मधुसूदन त्रिपाठी, देवेंद्र मिश्र नगरहा और शिरीष कुमार महरोत्रा— की निगरानी में कराया जाना था।
बार काउंसिल के प्रस्ताव को ठुकराने का आरोप
बार काउंसिल का आरोप है कि सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महामंत्री ने अपने सदन में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जो पूरी तरह असंवैधानिक है और इससे बार काउंसिल की गरिमा को ठेस पहुंची है। काउंसिल ने इसे अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 35 के तहत व्यावसायिक कदाचार की श्रेणी में माना है।
अनुशासन समिति करेगी सुनवाई
बहुमत से हुए निर्णय के तहत दोनों पदाधिकारियों का अधिवक्ता पंजीकरण निलंबित कर यह नोटिस जारी किया गया है कि उनका लाइसेंस क्यों न निरस्त कर दिया जाए। मामले को अनुशासन समिति के अध्यक्ष शिवकिशोर गौड़ और प्रतिनिधि सदस्य श्रीनाथ त्रिपाठी को सौंपा गया है, जो सुनवाई के बाद उचित आदेश पारित करेंगे। हालांकि, बैठक में सदस्य अखिलेश कुमार अवस्थी और परेश मिश्र ने यह मत रखा कि फिलहाल केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए था।
